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Showing posts from July, 2020

समाज में फैलता नशे का मकड़जाल

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सबसे बड़ी चिंता का विषय है कि मादक वस्तुओं का सेवन अब स्कूलों के विद्यार्थियों को अपनी चपेट में ले रहा है। आज बहुत से नशीले पदार्थ बाजार में आसानी से कम कीमत पर उपलब्ध हो रहे हैं। नतीजतन नशा करने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा होता जा रहा है। नशीले पदार्थों की मांग अधिक होने के कारण उनका उत्पादन व पूर्ति भी तेजी से होती जा रही है… नशाखोरी इस सदी की सबसे बड़ी समस्या है। देश में प्रतिदिन नशे की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है और पिछले कुछ वर्षों से हमारे युवाओं में नशे की लत आज समाज और सरकार के लिए चिंता का विषय बन चुकी है। युवा हमारी सबसे बड़ी शक्ति है और इसी आधार पर आज हम विश्व में एक बड़ी आर्थिक शक्ति के रूप में उभर कर सामने आ रहे हैं, लेकिन हमारे युवाओं के विरुद्ध हमारे पड़ोसी देश षड्यंत्र रच रहे हैं और हमारे युवाओं को नशे की लत लगाकर उन्हें बेकार बनाया जा रहा है। सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि यह नशा हमारे पड़ोसी देशों द्वारा हमारे देश में भेजा जा रहा है और हमारी सरकार तथा प्रशासन इसमें पूरी तरह अंकुश लगाने में नाकामयाब साबित हो रहे हैं। परंतु वर्तमान समाज को नशा मुक्त ब...

नाग पुजा

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भारत देश कृषिप्रधान देश था और है। सांप खेतों का रक्षण करता है, इसलिए उसे क्षेत्रपाल कहते हैं। जीव-जंतु, चूहे आदि जो फसल को नुकसान करने वाले तत्व हैं, उनका नाश करके सांप हमारे खेतों को हराभरा रखता है। महाभारत, रामायण से लेकर उपनिषदों, पुराणों और कई मिथक ग्रंथों में नागों को देवता के रूप में मान्यता प्राप्त है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि पृथ्वी शेषनाग के फन (सिर) पर टिकी हुई है। मान्यता है कि जैसे-जैसे पृथ्वी पर पाप कर्म बढ़ते हैं, शेषनाग क्रोधित होकर फन हिलाते हैं जिससे पृथ्वी डगमगा जाती है। इसी पुरातन किंवदंती के कारण नाग को देवता समझ कर पूजा जाने लगा। वैसे तो व्यावहारिक रूप में सर्प सम्पूर्ण पृथ्वी पर मौजूद हैं। सागर से लेकर रेगिस्तान तक, पर्वत से लेकर मैदान तक सर्प जाति प्रकृति और मानव के संबंधों की अहम कड़ी है।  हिंदू धर्म ग्रंथों में भी नाग जाति का संबंध अनेक रूपों में अलग-अलग देवी-देवताओं के साथ बताया गया है। नाग वेदों से पहले के देवता हैं। नाग देवता का वर्णन ऋग्वेद में भी मिलता है। नाग पूजन का प्रचलन प्राचीन काल से चला आ रहा है।  परन्तु  नाग की पूजा कर...

रानी इन्द्रमति की कथा

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द्वापर  युग में एक इंदुमती नाम की रानी जो कि चंद्र विजय राजा की पत्नी थी।वह लोक वेद के आधार पर साधना कर रही थी।करुणामय रूप में कबीर साहिब ने उनको सत्य ज्ञान दिया और रानी इंदुमती कबीर साहेब की शिष्य बनी  एक बार रानी इंदुमति  को सांप ने डस लिया था उनकी आयु शेष नहीं थी तो भी कबीर परमेश्वर ने उसकी आयु बढ़ा दी है और उस को जिंदा किया  हमने राम-कृष्ण जी तो लीलाएं खूब सुनी है, पर क्या आप जानते हो कि द्वापर युग में पूर्ण परमेश्वर कबीर जी ने भी रानी इंद्रमती जी को सांप (काल) से बचाया था (जबकि उनका जीवन भी शेष नही था)। रानी का पति चंद्र विजय जो एक पुण्यात्मा था  उसने कबीर परमेश्वर से नाम दीक्षा नहीं ली थी  इस कारण उसकी अकाल मृत्यु हो जाती है परंतु  कबीर परमात्मा ने रानी  इंद्रमति के पति को छह महीने की आयु प्रदान की भक्ति करने के लिए और सतलोक लेकर गए।   वर्तमान में सन्त रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदित शास्त्रानुकूल सत्य भक्ति से ऐसा संभव है