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कावड़ यात्रा शास्त्र विरुद्ध साधना है

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हर साल  श्रावण मास में लाखों की तादाद में कांवडिये सुदूर स्थानों से आकर गंगा जल से भरी कांवड़ लेकर पदयात्रा करके अपने गांव वापस लौटते हैं इस यात्राको कांवड़ यात्रा बोला जाता है। श्रावण की चतुर्दशी के दिन उस गंगा जल से अपने निवास के आसपास शिव मंदिरों में शिव भगवान  का अभिषेक किया जाता है। इन सब प्रिया का शास्त्र में प्रमाण नहीं मिलता यह सब शास्त्र के विरुद्ध इनको करने से कोई लाभ नहीं होता है  गीता जी में भी गीता ज्ञान दाता अर्जुन को कह रहा है कि जो व्यक्ति मन माना आचरण करते हैं अर्थात शास्त्र विरुद्ध भक्ति करते हैं उनको ना तो सुख प्राप्त होता  है और ना ही मोक्ष हो पाता है अधिक जानकारी के लिए अवश्य  पढ़ें जीने की राह

समाज में फैलता नशे का मकड़जाल

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सबसे बड़ी चिंता का विषय है कि मादक वस्तुओं का सेवन अब स्कूलों के विद्यार्थियों को अपनी चपेट में ले रहा है। आज बहुत से नशीले पदार्थ बाजार में आसानी से कम कीमत पर उपलब्ध हो रहे हैं। नतीजतन नशा करने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा होता जा रहा है। नशीले पदार्थों की मांग अधिक होने के कारण उनका उत्पादन व पूर्ति भी तेजी से होती जा रही है… नशाखोरी इस सदी की सबसे बड़ी समस्या है। देश में प्रतिदिन नशे की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है और पिछले कुछ वर्षों से हमारे युवाओं में नशे की लत आज समाज और सरकार के लिए चिंता का विषय बन चुकी है। युवा हमारी सबसे बड़ी शक्ति है और इसी आधार पर आज हम विश्व में एक बड़ी आर्थिक शक्ति के रूप में उभर कर सामने आ रहे हैं, लेकिन हमारे युवाओं के विरुद्ध हमारे पड़ोसी देश षड्यंत्र रच रहे हैं और हमारे युवाओं को नशे की लत लगाकर उन्हें बेकार बनाया जा रहा है। सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि यह नशा हमारे पड़ोसी देशों द्वारा हमारे देश में भेजा जा रहा है और हमारी सरकार तथा प्रशासन इसमें पूरी तरह अंकुश लगाने में नाकामयाब साबित हो रहे हैं। परंतु वर्तमान समाज को नशा मुक्त ब...

नाग पुजा

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भारत देश कृषिप्रधान देश था और है। सांप खेतों का रक्षण करता है, इसलिए उसे क्षेत्रपाल कहते हैं। जीव-जंतु, चूहे आदि जो फसल को नुकसान करने वाले तत्व हैं, उनका नाश करके सांप हमारे खेतों को हराभरा रखता है। महाभारत, रामायण से लेकर उपनिषदों, पुराणों और कई मिथक ग्रंथों में नागों को देवता के रूप में मान्यता प्राप्त है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि पृथ्वी शेषनाग के फन (सिर) पर टिकी हुई है। मान्यता है कि जैसे-जैसे पृथ्वी पर पाप कर्म बढ़ते हैं, शेषनाग क्रोधित होकर फन हिलाते हैं जिससे पृथ्वी डगमगा जाती है। इसी पुरातन किंवदंती के कारण नाग को देवता समझ कर पूजा जाने लगा। वैसे तो व्यावहारिक रूप में सर्प सम्पूर्ण पृथ्वी पर मौजूद हैं। सागर से लेकर रेगिस्तान तक, पर्वत से लेकर मैदान तक सर्प जाति प्रकृति और मानव के संबंधों की अहम कड़ी है।  हिंदू धर्म ग्रंथों में भी नाग जाति का संबंध अनेक रूपों में अलग-अलग देवी-देवताओं के साथ बताया गया है। नाग वेदों से पहले के देवता हैं। नाग देवता का वर्णन ऋग्वेद में भी मिलता है। नाग पूजन का प्रचलन प्राचीन काल से चला आ रहा है।  परन्तु  नाग की पूजा कर...

रानी इन्द्रमति की कथा

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द्वापर  युग में एक इंदुमती नाम की रानी जो कि चंद्र विजय राजा की पत्नी थी।वह लोक वेद के आधार पर साधना कर रही थी।करुणामय रूप में कबीर साहिब ने उनको सत्य ज्ञान दिया और रानी इंदुमती कबीर साहेब की शिष्य बनी  एक बार रानी इंदुमति  को सांप ने डस लिया था उनकी आयु शेष नहीं थी तो भी कबीर परमेश्वर ने उसकी आयु बढ़ा दी है और उस को जिंदा किया  हमने राम-कृष्ण जी तो लीलाएं खूब सुनी है, पर क्या आप जानते हो कि द्वापर युग में पूर्ण परमेश्वर कबीर जी ने भी रानी इंद्रमती जी को सांप (काल) से बचाया था (जबकि उनका जीवन भी शेष नही था)। रानी का पति चंद्र विजय जो एक पुण्यात्मा था  उसने कबीर परमेश्वर से नाम दीक्षा नहीं ली थी  इस कारण उसकी अकाल मृत्यु हो जाती है परंतु  कबीर परमात्मा ने रानी  इंद्रमति के पति को छह महीने की आयु प्रदान की भक्ति करने के लिए और सतलोक लेकर गए।   वर्तमान में सन्त रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदित शास्त्रानुकूल सत्य भक्ति से ऐसा संभव है 

जीवन रक्षक कबीर साहेबजी

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जीवन रक्षक कबीर परमेश्वर है । परमात्मा अपने भगतो की आयु भी बढा देते है। प्रमान के लिए देखिए 👇👇 ॠग्वेद मंडल 10 सूक्त 161 मंत्र 2 ॠग्वेद मंडल 9 सूक्त 80 मंत्र 2 जिस काया को रोग मुक्त कराने के लिए मानव अपनी संपत्ति को भी बेच कर उपचार कराता है। वह काया भी उसके साथ नहीं जाएगी, माया तो दूर की बात है। वास्तविक जीवन रक्षक परमेश्वर कबीर बिना यहां पर सब व्यर्थ है। 👇👇  Must watch बिना ज्ञान के प्राणी कहता है कि कहीं मैं मर ना जाऊं, जबकि वास्तविक जीवन रक्षक कबीर परमेश्वर कहते हैं कि  कि तुम जीवित कैसे हो। इस काल के लोग में तुम किसके भरोसे किसके सहारे पर बैठे हो।  बिना समरथ की बंदगी, कहीं ठौर ठिकाना नाही  कबीर परमेश्वर जी ही जीवन रक्षक हैं पवित्र कुरान शरीफ में लिखा है कि कबीर अल्लाह ही पाप विनाशक है और पूजा के योग्य है सूरत फुर्कानि 25 आयत 58 में प्रमाण है। जानने के लिए अवश्य देखें साधना टीवी शाम 7:30 बजे 

God is in form : Bible

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Holy Bible - Genesis - Sixth Day of Creation 1:26 - Then God said, "And now we will make human beings; they will be like us and resemble us. They will have power over the fish, the birds and all animals, domestic and wild, large and small." 1:27 - So God created human beings, making them be like himself. He created them male and female, These verses of the Holy Bible prove that God is not Formless. To know more about the Supreme god and to know who is father of jesus Must watch Sadhna tv daily at 7:30pm

Divine play of god kabir

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कबीर साहेब द्वारा सर्वानंद को शरण में लेना पंडित सर्वानंद ने अपनी माँ से कहा कि मैंने सभी ऋषियों को शास्त्रार्थ में हरा दिया है तो मेरा नाम सर्वाजीत रख दो लेकिन उनकी माँ ने सर्वानंद से कहा कि पहले आप कबीर साहेब को शास्त्रार्थ में हरा दो तब आपका नाम सर्वाजीत रख दिया जाएगा। जब सर्वानंद कबीर साहेब के पास शास्त्रार्थ करने पहुँचे तो कबीर साहेब ने कहा कि आप तो वेद-शास्त्रों के ज्ञाता हैं मैं आपसे शास्त्रार्थ नहीं कर सकता। तब सर्वानंद ने एक पत्र लिखा कि शास्त्रार्थ में सर्वानंद जीते और कबीर जी हार गए। उस पर कबीर साहेब जी से अंगूठा लगवा लिया। लेकिन जैसे ही सर्वानंद अपनी माँ के पास जाते तो अक्षर बदल कर कबीर जी जीते और पंडित सर्वानंद हार गए ये हो जाते। ये देखकर सर्वानंद आश्चर्य चकित हो गए और आखिर में हार मानकर सर्वानंद ने कबीर साहेब की शरण ग्रहण की। 🔅 एक बार द्रौपदी ने अंधे महात्मा को अपनी साड़ी के कपड़े में से टुकड़ा दिया था क्योंकि अंधे महात्मा की कोपीन पानी में बह गई थी। साधु ने आशीर्वाद अनंत चीर पाने का आशीर्वाद दिया। कबीर परमात्मा ने चीरहरण में द्रौपदी का चीर बढ़ाकर लाज बचाई। ग...