कावड़ यात्रा शास्त्र विरुद्ध साधना है

हर साल  श्रावण मास में लाखों की तादाद में कांवडिये सुदूर स्थानों से आकर गंगा जल से भरी कांवड़ लेकर पदयात्रा करके अपने गांव वापस लौटते हैं इस यात्राको कांवड़ यात्रा बोला जाता है। श्रावण की चतुर्दशी के दिन उस गंगा जल से अपने निवास के आसपास शिव मंदिरों में शिव भगवान का अभिषेक किया जाता है।
इन सब प्रिया का शास्त्र में प्रमाण नहीं मिलता यह सब शास्त्र के विरुद्ध इनको करने से कोई लाभ नहीं होता है 
गीता जी में भी गीता ज्ञान दाता अर्जुन को कह रहा है कि जो व्यक्ति मन माना आचरण करते हैं अर्थात शास्त्र विरुद्ध भक्ति करते हैं उनको ना तो सुख प्राप्त होता है और ना ही मोक्ष हो पाता है
अधिक जानकारी के लिए अवश्य पढ़ें जीने की राह

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